Banarasi Holi

दोस्तों आज हम आपको बताएंगे शिव की

नगरी काशी की Banarasi Holi के बारे में

Banarasi Holi

ये कोई आम होली नही है।

Banarasi Holi में जलती चिताओं के साथ होली खेली जाती है।

और इसे “मसाने की होली” के नाम से जाना जाता है।

हम सभी जानते हैं कि होली रंगों का त्यौहार

खुशियों का त्यौहार गुझियों और पापड़ का त्यौहार है।

होली के समय मौसम कितना रंगीन हो जाता है।

कितना खुशनुमा हो जाता है मार्केट में हर

तरफ बस रंग गुलाल और पिचकारियां की धूम

मची रहती है।

लोग नए नए कपड़े खरीदते हैं।

मार्केट का ये उत्साह और उल्लास देखते ही बनता है।

दोस्तों क्या आप जानते हैं कि होली किस दिन और क्यों मनाई जाती है।..??

अगर नहीं…..तो चलिए हम बताते हैं।

होली का यह त्योहार फाल्गुन महीने में पूर्णिमा

के दिन मनाई जाती है।

जैसा कि हम सभी जानते हैं कि भारत के हर

त्यौहार की अपनी एक अलग ख़ासियत और

पहचान होती है।

इसी तरह भारत के अन्य त्यौहारों की तरह

होली भी बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है।
प्राचीन पौराणिक कथा के अनुसार होली का त्योहार ,

हिरण्यकश्यप की कहानी से जुड़ी है।

जैसा कि हम सभी जानते है कि होली एक

पौराणिक त्यौहार तो है जिसमें लोग रंगों के

माध्यम से अपने खुशी और उत्साह को दर्शाते है।
माना जाता है कि इस दिन लोग अपने पुराने से

पुराने बैर को भी भूल जाते हैं और एक दूसरे

को गुलाल अबीर के साथ गले लगाकर

अपनेपन का इज़हार करते हैं।

अगर हम बात करें होली में इस्तेमाल होने वाले

रंगों कि तो पहले के समय में होली के रंग टेसू

या पलाश के फूलों से बनते थे और उन्हें गुलाल

कहा जाता था।

वो रंग त्वचा के लिए बहुत अच्छे होते थे

क्योंकि उनमें कोई Chemical नहीं होता था।

लेकिन समय के साथ रंगों की परिभाषा

बदलती गई।

और मार्केट में Chemical वाले चाइनीज़ रंगों

ने काफी हद्द तक इनकी जगह ले ली..।।

मगर अब पिछले कुछ समय से

Harbal Colour भी बाजार में उपलब्ध हो गए हैं।

जो हमारे Skin के लिए फायदेमंद तो है ही

साथ ही साथ Eco Friendly भी है।

दोस्तों जैसा कि हम बात कर रहे हैं शिव की

नगरी काशी यानि कि Banarasi Holi के बारे में

Banarasi Holi

मथुरा वृन्दावन की तरह ही बनारस की

“मशाने की होली” बहुत प्रसिद्ध है।

यह एक ऐसी प्रथा है जो अपने आप में अनोखी है।

श्मशान का नाम सुनते ही लोगों के मन में एक

खौंफ बैठ जाता है लेकिन बनारस के

महाश्मशान में बाबा भालेनाथ के भक्त जलती

चिताओं के बीच चिता भस्म के साथ होली

खेलते हैं।

महाश्मशान घाट पर होने वाली यह

“मसाने की होली” में भक्त चिता की भस्म ,

अबीर व गुलाल से होली खेलते हैं।

माना जाता है कि लगभग 350 साल से यह

परम्परा चली आ रही है और इसे देखने के

लिए भारी संख्या में लोगों की भीड़ इकट्ठा

होती है देश व विदेश से लोग बनारस आतें हैं।

Banarasi Holi

“मसाने की होली” अपने आप में एक अद्भुत

परम्परा और बाबा भोलेनाथ के भक्तों का एक

अलग ही रंग एक एक अलग ही अल्हड़पन

देखने को मिलता है।

Banarasi Holi

में बनारसी सब कुछ भूल कर एक अलग ही

मस्ती एक अलग ही अंदाज में रम जाते हैं।

जिसमें बनारसी भांग और ठंडई का तड़का

उसे और भी रंगीन बना देता है।..

तो दोस्तो अगली बार आप होली के समय जब

भी बनारस आए तो एक बार Banarasi Holi

“मसाने की होली” में जरूर शामिल हो..।।

और शिव की नगरी काशी के

Banarasi Holi

का आनंद जरूर उठाए..।।

इसके साथ ही हमें बताएं कि आपको हमारा ये Banarasi Holi Special Edition कैसा लगा

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